भैया...बधाई ... मुझे कोई आश्चर्य नही हुआ...ऐसा कुछ प्रत्याशित था आपसे...बल्कि मैं तो इंतज़ार कर रहा था... अपने दिल के गुबार को निकालने के लिए अच्छा मध्यम चुना है अपने... इससे अब आपकी एक अलग पहचान बनेगी..एकदम अलग...कार्य, परिवार, मित्र...सबसे अलग... मैं इस ब्लाग का नियमित पाठक और ...आलोचक रहूँगा... शुभकामनाएँ !
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से पढाई की, डेढ दशक से पत्रकारिता कर रहा हूँ. बहुत सी बातेँ निगाह मेँ आती हैँ जिन्हेँ आपके साथ साझा करना चाहता हूँ. अखबारोँ की नीतियाँ कलम की धार को कुन्द कर देती है. इसीलिये है यह ब्लॉग. आप और हम, आमने-सामने, बिल्कुल बेबाक
सँदीप त्रिपाठी
1 टिप्पणियाँ:
भैया...बधाई ...
मुझे कोई आश्चर्य नही हुआ...ऐसा कुछ प्रत्याशित था आपसे...बल्कि मैं तो इंतज़ार कर रहा था...
अपने दिल के गुबार को निकालने के लिए अच्छा मध्यम चुना है अपने...
इससे अब आपकी एक अलग पहचान बनेगी..एकदम अलग...कार्य, परिवार, मित्र...सबसे अलग...
मैं इस ब्लाग का नियमित पाठक और ...आलोचक रहूँगा...
शुभकामनाएँ !
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