सोमवार, 18 अगस्त 2008

मा तू कहा

मा तू कहा
मा
मेरी एक मुस्कराहट पर
तू जोर से हसती थी
खुद को दुनिया की
खुशकिस्मत कहती थी
मेरे खुल के हसने पर
मुझे ताका करती थी
आखो मे मोती भरकर
बस नज़र उतारा करती थी
मा तू कहा
तेरा सूरज यहा
तेरा चन्दा यहा
तेरी आखो का तारा यहा
मेरी मा तू कहा
मा
तेरी आन्चल की शह पाकर
मै सबसे लडता था
तेरे काजल का वो टीका
मुझे सबसे बचाता था
तेरी गोद मे सर छुपा कर
मै बेखौफ हो जाता था
तेरे हाथो की थपकी से
पल मे सो जाता था
तेरी मीठी लोरी सुन कर
मै सपनो मे खो जाता था
मा तू कहा
तेरा सूरज यहा
तेरा चन्दा यहा
तेरी आखो का तारा यहा
मेरी मा तू कहा
मा
मेरी बाते करते-करते
तू खुशी से हसती रोती
मेरे गुणो की बाते
तू करते नही थी थकती
मेरी सारी कमिया
तू जोर लगा के ढकती
तू जब तक थी मा
मै था सबसे प्रखर, सबसे सशक्त, सबसे सुन्दर
मा तू कहा
तेरा सूरज यहा
तेरा चन्दा यहा
तेरी आखो का तारा यहा
मेरी मा तू कहा

मा
जब मै गुस्से मे तुझे
डाटा करता था
तू झूठ-मूठ की अपनी
गलती माना करती
जब मै उदास हो कर
तेरा प्यार झटक देता था
तू मन ही मन मे मुझको
पुचकारा करती थी
वो प्यार दे दे मा
वो स्पर्श दे दे मा
मा तू कहा
तेरा सूरज यहा
तेरा चन्दा यहा
तेरी आखो का तारा यहा
मेरी मा तू कहा
मा
मेरा बुखार मे पडना
तेरा रात भर सिरहाने बैठ
पट्टिया गीली कर बदलना
मेरे घर आने मे देर होना
तेरा हर आहट पर दौड कर देखना
मेरा खाना ना खाना
और तेरे थाल का पडा रह जाना
मुझे वो पल लौटा दे मा
मा तू कहा
तेरा सूरज यहा
तेरा चन्दा यहा
तेरी आखो का तारा यहा
मेरी मा तू कहा
मा
वो दर्द मे तेरी डूबी
आवाज़ सुनी थी मा
तुने पुकारा था
पर सुन ना पाया मा
तूने हाथ बढाया था
पर थाम ना पाया मा
तू यू चली जायेगी
ये सोच ना पाया मा
माफ कर दे मा
लौट आ जा मा
मा तू कहा
तेरा सूरज यहा
तेरा चन्दा यहा
तेरी आखो का तारा यहा
मेरी मा तू कहा

प्रसून त्रिपाठी
(१९ जुलाई, २००८ को मा के अचानक देहान्त पर)

1 टिप्पणियाँ:

केसर ने कहा…

आपका जिय रजा बनारस ब्लाग पर कुछ बनारस के रंग आया नहीं। कबीर के धरती को प्रणाम