रविवार, 24 अगस्त 2008

ये क्या हो रहा है

बीते दिनोँ आजमगढ मे एक आतँकी अबुल बशर गिरफ्तार किया गया. उसे अहमदाबाद विस्फोट का मास्टरमाइन्ड बताया जा रहा है. अब आजमगढ मेँ बशर मामले मेँ सियासत शुरू हो गयी है. मौलाना बुखारी उसके गाँव पहुँचे और सपा ने मौका लपक लिया. हालत यह है कि कुछ अखबार भी बशर के कारनामोँ के बजाय उसके माँ-बाप की दीन-हीन दशा को केन्द्र मेँ रख कर स्टोरी छाप रहे हैँ. अखबारोँ से बशर के बारे मेँ स्टोरी गायब है. अहमदाबाद मेँ 57 लोगोँ के आतँकी विस्फोट मेँ मरने की बात गौण हो गयी है. अगर हम आतँक के विरोध के बजाय आतँकियोँ के ही पक्ष मेँ खडे दिखेँगे और हर घटना को सियासत की नजर से देखेँगे तो फिर तो खत्म हो चुका आतँकवाद.


सँदीप त्रिपाठी

3 टिप्पणियाँ:

Ila's world, in and out ने कहा…

संदीपजी आप बनारस से हैं जो कि मेरे प्रियतम शहरों में से एक है.सिर्फ़ दो साल बनारस में गुज़ारे हैं,जो मेरे जीवन के सबसे रोचक और रोमांचक वर्ष रहे हैं. बहरहाल,इस वक्त आपकी पोस्ट पर क्या लिखूं ? हमारे देश का दुर्भाग्य है कि हमारे यहां हर इशू सियासत से गवर्न होता है,कितनों की जानें गईं,या अवाम कितने खतरे में है,ये सोचना सियासत से जुडे लोगों का काम नहीं है,वो तो सिर्फ़ वोट की महत्ता को सलाम करते हैं

शहरोज़ ने कहा…

ब्लॉग की दुनिया में आप भी , हार्दिक स्वागत!
उत्कट इक्छा आपके मन में है, और कोशिश भी की है, अच्छा लगा.
कभी समय मिले तो इस तरफ भी रुख़ कीजिये:
http://shahroz-ka-rachna-sansaar.blogspot.com/
http://saajha-sarokaar.blogspot.com/
http://hamzabaan.blogspot.com/

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