शुक्रवार, 3 अक्तूबर 2008

सुशील त्रिपाठी

हिन्दुस्तान वाराणसी के प्रमुख सँवाददाता और पूर्वाँचल के या पूर्वाँचल से बाहर गये अधिकाँश पत्रकारोँ के गुरु सुशील त्रिपाठी जी 30 सितँबर को चँदौली जिले मेँ दुर्घटनाग्रस्त हो गये. वे दुर्घटना के बाद से लगातार बीएचयू के आईसीयू मेँ वेन्टीलेटर पर हैँ. डाक्टर उनकी हालत 3 अक्टूबर रात तक स्थिर बता रहे थे. दुर्घटना के वक्त मैँ उनसे करीब एक किमी दूर दूसरी पहाडी पर था. उनके साथ मौजूद लोगो ने दुर्घटना के बारे मेँ बताया कि वे अपना काम खत्म करके नीचे उतर रहे थे. कुछ दूर उतरने के बाद उन्होँने एक चट्टान पर पहला पैर रखा और दूसरा पैर रखते वक्त पहला पैर फिसल गया. उस वक्त उनके साथ 10 से 15 स्थानीय लोग थे. वे सुशील जी का हाथ थामते, इससे पहले ही वे लुढकते हुए करीब 30 से 35 फुट नीचे खाई मेँ जा गिरे. स्थानीय लडके नीचे दौडे, तब तक सुशील जी बेहोश हो चुके थे. उनके ललाट से खून बह रहा था. लोगो ने उन्हेँ उठा कर नीचे लाना चाहा लेकिन यह सम्भव नहीँ हुआ. तब पास के गाँव से चारपाई मँगाई गयी. उस पर उन्हेँ लिटा कर नीचे लाया गया. हमेँ सूचना हुई. मेरे साथ भी 10 स्थानीय लोग थे. हम लोग पहाडी से उतरकर नीचे आये. उन्हेँ कार मेँ लादा गया और चकिया स्वास्थ्य केँद्र ले आये. उनकी नब्ज बहुत धीमी चल रही थी. साँस लेने मेँ भी दिक्कत हो रही थी. वहाँ डाक्टरोँ ने उनका प्राथमिक उपचार किया. इस बीच उनके जानने वालोँ को खबर हो चुकी थी, लगातार सभी के फोन आ रहे थे. फिर अम्बुलेन्स की व्यवस्था कर उन्हेँ बीएचयू लाया गया. फिलहाल डाक्टर लगे हुए हैँ. 72 घँटे बीत चुके हैँ. नब्ज आज शाम थोडी ठीक होने की सूचना है. चूँकि डाक्टर होठ सिले हुए हैँ, इसलिये किसी सूचना को पुष्ट नहीँ कहा जा सकता. फिलहाल लोग दुआएँ करते हुए उनके ठीक होने का इन्तजार कर रहे हैँ.

दुर्घटना के बाद सुशील जी को उस स्थिति मेँ देखना बहुत ही कठिन था, वह भी उस स्थिति मेँ उन्हेँ लेकर चकिया से वाराणसी तक का सफर कैसे गुजरा, यह याद भी करना बहुत ही पीडादायक है. दो दिन तक तो वही चेहरा दिल-दिमाग पर छा कर पतझड की दोपहरिया जैसा आभाष देता रहा. थोडा स्वस्थ हुआ तो यही ख्याल आया कि सबसे पहले वह रिपोर्ट लिखनी चाहिए जिसके लिए बाबा मना करने के बावजूद पहाडी पर चढे.

3 टिप्पणियाँ:

Tara Chandra Gupta "MEDIA GURU" ने कहा…

aapke lekh se aur jankari mili hai. vastav me ek varisth patrkar ka hamare beech se asmay jana bahut dukhad hai.

journalist ने कहा…

trasad hai yeh ghatna, patrakarita ke maharathi ko salaam.

anil dixit, agra

pankaj ने कहा…

baba ke bare me dukahd jankari mili. baba mere bhi guru rahe hai. kam mulakat huai lakin sukhad mulakat rahi, allahabad me baba jab rahe to milata raha, vo banaras gaye aur mai delhi aa gaya. uske bad ek bar agra me mile to last bar banars me mulakat hui thi aur maine kaha tha ki apki khubsurat kritiyo ke ek pardarshni delhi me lagaya jaye, laiken vo kam adhora rah gaya, jab pata chala to bara ajeeb laga, khabar mili to aisa laga ki koi saap songh gaya, kya kare honi ko koi nahi tal sakata, baba ko meri shradhanjali.
kumar pankaj