सुशील जी की मृत्यु के बारें में हिन्दुस्तान में पढ़ा और फ़िर याद करते रहे उनकी रिपोर्टिंग हिन्दुस्तान पढ़ते रहने के कारण उनसे एक जुडाव सा महसूस होता था उनके परिवार के प्रति हार्दिक संवेदनाएं
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से पढाई की, डेढ दशक से पत्रकारिता कर रहा हूँ. बहुत सी बातेँ निगाह मेँ आती हैँ जिन्हेँ आपके साथ साझा करना चाहता हूँ. अखबारोँ की नीतियाँ कलम की धार को कुन्द कर देती है. इसीलिये है यह ब्लॉग. आप और हम, आमने-सामने, बिल्कुल बेबाक
सँदीप त्रिपाठी
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सुशील जी की मृत्यु के बारें में हिन्दुस्तान में पढ़ा और फ़िर याद करते रहे उनकी रिपोर्टिंग
हिन्दुस्तान पढ़ते रहने के कारण उनसे एक जुडाव सा महसूस होता था
उनके परिवार के प्रति हार्दिक संवेदनाएं
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