सोमवार, 6 अक्तूबर 2008

सुशील त्रिपाठी _ चित्रोँ के झरोखे से




सुशील त्रिपाठी हिँदुस्तान मेँ अपने डेस्क पर काम करते हुए








सुशील त्रिपाठी लखनउ के एक होटल मेँ






1 टिप्पणियाँ:

रौशन ने कहा…

सुशील जी की मृत्यु के बारें में हिन्दुस्तान में पढ़ा और फ़िर याद करते रहे उनकी रिपोर्टिंग
हिन्दुस्तान पढ़ते रहने के कारण उनसे एक जुडाव सा महसूस होता था
उनके परिवार के प्रति हार्दिक संवेदनाएं